काव्य का स्वरूप | Kavya Ka Swarup

kavya ka swarup

कवि की रचना को काव्य कहते हैं। कवि जीवन और जगत् की अनुभूति को शब्द और अर्थ के सामञ्जस्य का आधार लेकर अपनी प्रतिभा के बल पर रमणीय, रसात्मक और आह्लादकारी बनाकर प्रस्तुत करता है। उसकी पुनः सृष्टि करता है। उसकी यह अभिनव सृष्टि ही काव्य है। आज इस लेख में हम Kavya Ka Swarup का विस्तार से अध्ययन करेंगे ।

अलंकार सम्प्रदाय |Alankar Sampraday | Alankar Siddhant | Bhartiya Kavya Shastra

Alankar Sampraday

   अलंकार काव्य का वह तत्व है जो उसे अलंकृत करता है । अर्थात् अलंकार काव्य को सुंदर बनाता है । सर्वप्रथम आचार्य भरत मुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ में चार अलंकारों – उपमा, रूपक, दीपक और यमक का उल्लेख मिलता है ।  किन्तु अभी अलंकार-सिद्धान्त का जन्म नहीं हुआ था ।   संस्कृत काव्यशास्त्र में कालक्रम की … Read more

error: Content is protected !!