भारतेन्दुयुगीन हिंदी आलोचना | Bhartenduyugin Hindi Alochana
वर्तमान युग में ‘आलोचना’ नामक विधा का तीव्र गति से विकास हुआ है । आलोचना का वास्तविक उद्भव संस्कृत की काव्यशास्त्रीय परंपरा में मिलता है , किन्तु हिंदी में भारतेन्दु युग से ही हिंदी आलोचना का सूत्रपात मिलता है । भारतेन्दु ने ‘नाटक’ नामक सर्वप्रथम आलोचनात्मक ग्रंथ लिखा। आज हम Bhartenduyugin Hindi Alochana का विस्तार से अध्ययन करेंगे और इसे समझने का प्रयास करेंगे ।