आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी की आलोचना पद्धति | Acharya Nanddulare Vajpeyi Ki Alochana Paddhati
अर्थात् उनके अनुसार ‘साहित्य’ की ‘स्वतंत्र सत्ता की स्वीकृति’ ही स्वच्छन्दतावाद का केंद्रीय तत्व है । आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी की प्रसिद्धि हिंदी में सौष्ठववादी आलोचक के रूप में है। सौष्ठववादी समीक्षा पद्धति में ‘काव्य के सौन्दर्योद्घाटन’ पर विशेष बल दिया जाता है, शास्त्रीय समीक्षा पर नहीं। आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने ‘प्रसाद’, ‘निराला’ और ‘पन्त’ की समीक्षा स्वच्छन्दतावादी एवं सौन्दर्य-बोधक मूल्यों की दृष्टि से की और इन्हें ‘छायावाद’ की वृहतत्रयी के रूप में प्रतिष्ठित किया । उनके अनुसार- “काव्यशास्त्र के सिद्धान्तों से ऊपर उठकर सौन्दर्य का उद्घाटन करना ही आलोचक का प्रधान कार्य है।” आलोचक अपनी प्रतिभा से भावों के उदात्त स्वरूप एवं मार्मिकता का विश्लेषण कर स्वयं तो आनन्दित होता ही है, पाठक को भी इसी भावभूमि पर ले जाता है। आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ‘छायावाद’ को प्रतिष्ठित करने वाले समीक्षक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने छायावादी काव्य की विस्तृत समीक्षा करते हुए इस काव्यधारा को स्थापित करने … Read more