अरस्तू का अनुकरण सिद्धांत | Arastu Ka Anukaran Siddhant

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Arastu Ka Anukaran Siddhant

पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में यूनानी विद्वान अरस्तू (384 ई.पू.-322 ई.पू.) का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है । वे एक ओर तो प्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो के शिष्य थे तो दूसरी ओर विश्व-विजेता सिकंदर महान के गुरु होने का गौरव भी उन्हें प्राप्त है।    उन्होंने अपने जीवन में लगभग चार सौ ग्रन्थों की रचना की । उनके साहित्य-संबंधी विचार ‘काव्य-शास्त्र’ (Poetics) एवं ‘भाषण-शास्त्र’ (Rhetorics) में उपलब्ध होते हैं। इन्हीं के आधार पर हम अरस्तू के अनुकरण सिद्धान्त पर प्रकाश डालने का प्रयत्न करेंगे । यूनानी भाषा के ‘मिमेसिस’ (Mimesis) शब्द का अंग्रेजी में रूपांतरण किया गया है- ‘इमिटेशन’ (Imitation) और हिंदी में इसका अनुवाद है ‘अनुकरण’ या ‘अनुकृति’ । पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय चिंतन में अनुकरण सिद्धांत का बड़ा व्यापक प्रभाव और महत्व है। इसका संबंध काव्य की रचना प्रक्रिया से है । अरस्तू ने प्लेटो के अनुकरण संबंधी मत का संशोधन और विशद विश्लेषण करके उसे एक कला सिद्धांत के रूप में … Read more

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