मार्क्सवादी साहित्य और कला-चिन्तन | Marxvadi Sahitya aur Kala Chintan | Marxvadi Sahitya Chintan
मार्क्सवादी कला और साहित्य-चिन्तन मार्क्सवादी दर्शन से प्रभावित है। इसके दो प्रमुख आधार हैं- एक द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद और दूसरा ऐतिहासिक भौतिकवाद। द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद एक विकास का सिद्धान्त है जो क्रिया, प्रतिक्रिया और समन्वय के द्वारा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसका संबंध प्रकृति और जगत के नियमों की व्याख्या से है । ऐतिहासिक भौतिकवाद मनुष्य के सम्पूर्ण इतिहास की व्याख्या है । मानव-समुदाय का मूल प्रयत्न आर्थिक या उत्पादन-परक है। इसी के लिए वह श्रम का आधार ग्रहण करता है। इन्हीं तत्त्वों के आधार को ग्रहण कर कला और साहित्य का निर्माण होता है। अतः कला और साहित्य भी मानव के व्यापक कार्यकलाप का अंग है। वह उसके श्रम को मधुर बनाता है और उत्पादन के उपरान्त प्राप्त सफलता के आधार पर आगे के निर्माण और विकास की कल्पना प्रदान करता है और उसका मार्ग प्रशस्त करता है। इस प्रकार मार्क्सवाद साहित्य और कला के सम्बन्ध में एक … Read more