साहित्य का उद्देश्य | Sahitya ka Uddeshya | Sahitya ka Prayojan | साहित्य का प्रयोजन

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Sahitya ka Uddeshya

साहित्य शब्द और अर्थ के समन्वित सौंदर्य से निर्मित ऐसी लोकमंगलकारी रचना है जो रचनाकार के भावों, विचारों और आदर्शों को पाठक या समाज तक सम्प्रेषित करती है।  विद्वानों के अनुसार ‘साहित्य’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है = सहित + यत् प्रत्यय । अर्थात साहित्य का अर्थ है – साथ होने का भाव या सहभाव । इसका अर्थ यह कि जहाँ शब्द और अर्थ एक साथ आते हैं,वही साहित्य है। इसमें कल्याण का भाव समाहित होता है। कल्याण के इसी भाव को लक्षित करके आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा- “निखिल विश्व के साथ एकत्व की साधना ही साहित्य है”। स्पष्ट है कि साहित्य हमारी संवेदना के तारों को झकझोरता हुआ हमें संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है ताकि हम समूचे विश्व के साथ एकत्व को महसूस करते हुए वैश्विक संवेदना के साथ जुड़ाव विकसित कर सकें। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ की भूमिका … Read more

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