संरचनावाद क्या है | Sanrachanavad Kya Hai
संरचनावाद अंग्रेजी शब्द (Structuralism) का हिंदी पर्याय है । संरचनावाद पाश्चात्य समीक्षा जगत से हिंदी में आया। यह 1960 के दशक के फ्रांस में विकसित बौद्धिक विश्लेषण एवं चिंतन की वह पद्धति है जिसे विश्व स्तर पर भाषाविदों, साहित्य समीक्षकों, दार्शनिकों, मनोविज्ञान शास्त्रियों तथा नृविज्ञान शास्त्रियों (anthropologist) का उत्साहवर्द्धक समर्थन मिला । तो चलिए आज हम sanrachanavad kya hai को विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं । ‘संरचनावाद’ की अवधारणा का मूल स्त्रोत जेनेवा और पेरिस में भाषाविज्ञान के प्रोफेसर फर्डिनेन्ड-डि-सस्यूर (Ferdinand de Saussure, 1857-1913) द्वारा प्रतिपादित ‘भाषा-सिद्धांत’है ।‘संरचनावाद’ का केंद्रवर्ती बिन्दु ‘कृति’ है, कृतिकार अथवा समीक्षक नहीं । ‘संरचनावाद’ का गहरा संबंध ‘भाषा’ से है । ‘संरचनावाद’ भाषिक दृष्टि से साहित्य के मूल्यांकन का प्रतिमान (model) है। भाषा का ऐसा कलात्मक प्रयोग, जो मानव स्थितियों के नाना पहलुओं को साहित्य के माध्यम से प्रस्तुत करता है, ‘संरचनावाद’ के अंतर्गत आता है। भाषा और अर्थ परस्पर जुड़े रहते हैं । अतः किसी भी साहित्यिक कृति … Read more