तुलसीदास की समन्वय भावना | Tulsidas Ki Samanvay Bhavna
17 min read
तुलसीदास का प्रादुर्भाव ऐसे समय में हुआ जब धर्म, समाज, राजनीति, आदि सभी क्षेत्रों में विषमता, विभेद एवं वैमनस्य व्याप्त था। शैवों और वैष्णवों में पारस्परिक ईर्ष्या-द्वेष बढ़ता जा रहा था। तुलसीदास से पूर्व सन्त कवियों ने सारे भारत में भावात्मक एकता स्थापित करने का प्रयास किया, किन्तु तुलसीदास ने इस विषमता को दूर करने के लिए समन्वय का अनूठा प्रयास किया।