प्लेटो का काव्य सिद्धांत | Plato ka Kavya Siddhant

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Plato ka Kavya Siddhant

पाश्चात्य काव्य-चिंतन की परंपरा का विकास 5 वीं सदी ईस्वी पूर्व से माना जाता है। पतंतु पाश्चात्य आलोचना में भौतिक सिद्धान्तों का सर्वप्रथम प्रतिपादन प्लेटो द्वारा ही हुआ । इसी काल में पाश्चात्य अर्थात् ग्रीक आलोचना का क्रमबद्ध स्वरूप देखने को मिलता है । इसके पहले कतिपय यूनानी साहित्यकारों (होमर, पिण्डार, गार्जियस, अरिस्टोफनीस आदि) की कृतियों में हमें भले ही कुछ फुटकर आलोचना के सिद्धान्तों के दर्शन हों, किन्तु उनका कोई सारगर्भित और व्यवस्थित रूप हमें देखने को नहीं मिलता । एक व्यवस्थित शास्त्र के रूप में पाश्चात्य साहित्यालोचन की पहली झलक प्लेटो (427-347 ई.पू.) के ‘इओन’ नामक संवाद में मिलती है । प्लेटो का जन्म 427 ई.पू.में एथेंस में हुई और मृत्यु 347 ई.पू.में हुई। इनका मूल नाम अरिस्तोक्लिस था, लेकिन इनके गुरु ने इन्हें प्लातोन नाम दिया। आज हम इन्हें अरबी-फारसी में अफलातून और अंग्रेजी में प्लेटो के नाम से जानते हैं। प्लेटो की महत्वपूर्ण रचनाएँ ईओन (Ion), विचार … Read more

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