वाक्य के भेद | वाक्य के प्रकार | Vakya ke Bhed | Vakya ke Prakar

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शब्दों का अपना अर्थ होता है, लेकिन इनको बिना किसी क्रम के अलग-अलग बोलने से वक्ता का पूरा अभिप्राय स्पष्ट नहीं हो पाता। जबकि शब्दों को निश्चित क्रम और स्वाभाविक गति से बोलने पर वक्ता का अभिप्राय स्पष्ट हो जाता है।   जैसे – नदी के किनारे-किनारे एक गाय जा रही थी। अतः हम कह सकते हैं- वाक्य पदों का वह व्यवस्थित समूह है जिसमें पूर्ण अर्थ देने की क्षमता अथवा सामर्थ्य होता है।   वाक्य के अंग (Parts of Sentence)  वाक्य के दो अंग होते हैं- (1) उद्देश्य (Subject)   (2) विधेय (Predicate) एक छोटा-सा वाक्य लें – राहुल आया। इसके दो अंग हैं- 1. राहुल  2. आया।   यहाँ राहुल के बारे में बात की गई है अतः ‘राहुल’ वाक्य का उद्देश्य(Subject) है। राहुल के बारे में कहा गया है कि वह ‘आया’। यहाँ ‘आया’ विधेय (Predicate)  है। उद्देश्य (Subject) वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाए, उसे उद्देश्य (Subject) … Read more

समास और उसके प्रकार | Samas Aur Uske Prakar

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Samas aur uske prakar

समास के माध्यम से भी शब्दों का निर्माण होता है। समास का शाब्दिक अर्थ है संक्षेप। समास प्रक्रिया में शब्दों का  संक्षिप्तीकरण किया जाता है । 1.देश के लिए भक्ति  = देशभक्ति 2.राम और लक्ष्मण = राम-लक्ष्मण 3. रसोई के लिए घर = रसोई घर समास का अर्थ : ‘समास’ का शाब्दिक अर्थ है – छोटा करना या संक्षिप्त करना। जैसे- गंगा का जल = गंगाजल, जेब के लिए खर्च  = जेबखर्च।      अतः हम कह सकते हैं- दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर, संक्षिप्त कर नया शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।      इस प्रक्रिया द्वारा जो नए शब्द बनते हैं, वे समस्त-पद या सामासिक पद  कहलाते हैं। समस्त पद का पहला पद पूर्वपद तथा दूसरा पद उत्तरपद कहलाता है। समास-विग्रह : समस्त पद को पुनः पहले की स्थिति में लाने की प्रक्रिया को ‘समास-विग्रह’ कहा जाता है। अर्थात्  समस्त-पद या सामासिक पद के सभी … Read more

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